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Lucky Winners for Gurmat Sunday Quiz No. 90

*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫ਼ਤਹਿ*

ਗੁਰਮਤਿ ਸੰਡੇ ਕੁਇਜ਼ ਨੰ: 90

ਸਹੀ ਜੁਆਬ ਹੈ
*D. ਰਾਜਾ ਜੈ ਸਿੰਘ ਦੀ*

ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਵਿੰਨਰ ਹਨ

ਪਹਲੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਕਰਨਬੀਰ ਸਿੰਘ*
ਅੰਮ੍ਰਿਤਸਰ
9915557272

ਦੂਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਹਰਜੋਤ ਸਿੰਘ*
ਨਵੀ ਦਿੱਲੀ
8826016160

ਤੀਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਕੁਲਜੀਤ ਸਿੰਘ*
ਫਰੀਦਾਬਾਦ (ਹਰਿਆਣਾ)
9953692345

ਸਾਰੇ ਵਿੰਨਰਸ ਨੂੰ ਵਧਾਈ

*ਵਿੰਨਰ ਆਪਣਾ… ਕੋਈ ਦੂਜਾ ਨੰਬਰ ਰਿਚਾਰਜ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹਨ*

ਨੋਟ: 5pm ਤੱਕ ਸਹੀ ਭੇਜੇ ਗਏ ਜੁਆਬ ਦਾ ਡਰਾਅ ਨਿਕਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਡਰਾਅ ਰਾਂਹੀ ਵਿੰਨਰ ਚੁਣੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ

ਅਗਲੇ ਐਤਵਾਰ ਲਈ ਆਪ ਸਭ ਨੂੰ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾ

ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸੁਆਲ ਦੇ ਹੇਠ ਲਿਖੇ T&C ਵੀ ਪੜੋ ਜੀ

*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਿਹ*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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गुरु गोबिंद सिंह जी के नाम पर जारी होगा 350 रुपये का सिक्का

भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही 350 रुपये का सिक्का जारी करने वाला है। आरबीआई इसे गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के 350वें प्रकाशोत्सव पर आम जनता के लिए बाजार में पेश करेगा। जानकारी के लिए आपको बता दें कि इस सिक्के को बहुत ही छोटी अवधि के लिए जारी किया जाएगा। आरबीआई की ओर से इस तरह के सिक्के खास अवसरों पर भी जारी किये जाते हैं।
क्या है इसकी खासियत-
350 रुपये का यह सिक्का 44 एमएम का होगा। इसमें चांदी, कॉपर, निकल और जिंक मिला हुआ होगा। सिक्के के आगे के हिस्से में अशोक स्तंभ होगा जिसके नीचे सत्यमेव जयते लिखा होगा। साथ ही इसके सिक्के के दोनों तरफ अंग्रेजी में इंडिया और देवनागरी लिपि में भारत लिखा होगा। इसी हिस्से पर रुपये का सिंबल और बीच में 350 लिखा होगा। वहीं सिक्के के पीछे के हिस्से पर अंग्रेजी और देवनागरी में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का 350वां प्रकाश उत्सव लिखा होगा। इस पर 1666-2016 भी लिखा होगा।
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Lucky Winner of Gurmat Sunday Quiz No.89

*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫ਼ਤਹਿ*

ਗੁਰਮਤਿ ਸੰਡੇ ਕੁਇਜ਼ ਨੰ: 89

ਸਹੀ ਜੁਆਬ ਹੈ
*C. ਬਚਿੱਤਰ ਸਿੰਘ ਨੇ*

ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਵਿੰਨਰ ਹਨ

ਪਹਲੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਹਰਦਿਆਲ ਸਿੰਘ*
ਨਵੀ ਦਿੱਲੀ
9810162048

ਦੂਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਅਮਰਜੀਤ ਕੌਰ*
ਅਲਵਰ (ਰਾਜ.)
(ਬੀਬੀਆਂ ਦਾ ਨੰਬਰ ਨਹੀਂ ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ)

ਤੀਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਹਰਜੋਤ ਸਿੰਘ*
ਨਵੀ ਦਿੱਲੀ
8826016160

ਸਾਰੇ ਵਿੰਨਰਸ ਨੂੰ ਵਧਾਈ

*ਵਿੰਨਰ ਆਪਣਾ… ਕੋਈ ਦੂਜਾ ਨੰਬਰ ਰਿਚਾਰਜ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹਨ*

ਨੋਟ: 5pm ਤੱਕ ਸਹੀ ਭੇਜੇ ਗਏ ਜੁਆਬ ਦਾ ਡਰਾਅ ਨਿਕਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਡਰਾਅ ਰਾਂਹੀ ਵਿੰਨਰ ਚੁਣੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ

ਅਗਲੇ ਐਤਵਾਰ ਲਈ ਆਪ ਸਭ ਨੂੰ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾ

ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸੁਆਲ ਦੇ ਹੇਠ ਲਿਖੇ T&C ਵੀ ਪੜੋ ਜੀ

*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਿਹ*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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सिख राज: इतिहास के पन्नो से

देखना कही शोर मे अपना इतिहास न भूल जाना : आज के दिन हमारे पुरखो ने “लाल किले” पर खालसाई परचम लहरा
के दिल्ली  #फतेह किया था

11 मार्च 1783 को सरदार बघेल सिंह की अगवाई मे लगभग 30,000 हथियारबंद सिक्खों ने दिल्ली पर फतेह दर्ज कर #लाल किले पर खलसाई झंडा  लहराया था ।
 
उस के बाद सुल्तान-ऐ-कौम सरदार जसा सिंघ  #अलुवालिया को दीवान-ऐ-आम के तख्त पर बिठाया गया । फिर उस के बाद  मुगल बादशाह शाह  आमल-2 और सिक्खों के बीच समझौते की बात चली । सरदार बघेल सिंह ने सिक्ख गुरूओ से संबंधित इतिहासिक जगहों के ऊपर गुरुद्वारे बनाने का फैसला किया,और मुगल राज दी कुल आमदन का 12.5% टैक्स सिक्खो को भरने का इकरार किया गया ।सरदार बघेल सिंह अपने 4000 हथियारबंद घोड़सवार  सिक्खों के साथ लगभग 8 महीने दिल्ली सब्जी मंडी इलाके में रुके और दिल्ली के प्रशाशन को अपने हाथों में  ले लिया । उन्होंने सिक्ख गुरुओं से संबंधित 7 जगहों की निशानदेही की और सिर्फ 8 महिनो में गुरद्वारों की उसारी की ।। जिस में  गुरुद्वारा सीस गंज साहिब, गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब, गुरुद्वारा बंगला साहिब, गुरुद्वारा बाला साहिब, गुरुद्वारा मंजू का टिल्ला, गुरुद्वारा साहिब मोतीबाग, गुरुद्वारा साहिब माता सुंदरी शामिल है ।

  सरदार बघेल सिंह ने 8 महीने दिल्ली पर राज किया । सरदार बघेल सिंह के हथियारबंद घोड़ सवार सिक्ख दिन- रात दिल्ली की सड़कों पर पहरा देते हुए हर ऐक पर नजर रखते थे। दिल्ली के लोगो को अमन कानून का वो नज़ारा देखने को मिला जो उन्होंने पहले कभी नही देखा था । लोग चाहते थे कि सरदार बघेल सिंह दिल्ली’में का बादशाह बन कर रहे और सरदार बघेल सिंह के पास इतनी ताकतवर  फ़ौज थी कि अगर वो चाहते तो राज कर सकते थे, पर वो अपने इकरार में रहे और दिसम्बर 1783 में वापस पंजाब आ गए ।

        हिंदी तर्जमा
     
     
   भाई इंदर सिंह घग्घा जी         
      की दीवार से धन्यवाद सहित । 🙏🙏

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Bhagat Singh, Sukhdev, Rajguru Martyrdom

मेरा रँग दे बसन्ती चोला, मेरा रँग दे;
मेरा रँग दे बसन्ती चोला। माय रँग दे बसन्ती चोला।।

26 अगस्त, 1930 को अदालत ने भगत सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 129, 302 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 6एफ तथा आईपीसी की धारा 120 के अंतर्गत अपराधी सिद्ध किया। 7 अक्तूबर, 1930 को अदालत के द्वारा 68 पृष्ठों का निर्णय दिया, जिसमें भगत सिंह, सुखदेव तथा राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई। फांसी की सजा सुनाए जाने के साथ ही लाहौर में धारा 144 लगा दी गई। इसके बाद भगत सिंह की फांसी की माफी के लिए प्रिवी परिषद में अपील दायर की गई परन्तु यह अपील 10 जनवरी, 1931 को रद्द कर दी गई। इसके बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष पं. मदन मोहन मालवीय ने वायसराय के सामने सजा माफी के लिए 14 फरवरी, 1931 को अपील दायर की कि वह अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए मानवता के आधार पर फांसी की सजा माफ कर दें। भगत सिंह की फांसी की सज़ा माफ़ करवाने हेतु महात्मा गांधी ने 17 फरवरी 1931 को वायसराय से बात की फिर 18 फरवरी, 1931 को आम जनता की ओर से भी वायसराय के सामने विभिन्न तर्को के साथ सजा माफी के लिए अपील दायर की। यह सब कुछ भगत सिंह की इच्छा के खिलाफ हो रहा था क्यों कि भगत सिंह नहीं चाहते थे कि उनकी सजा माफ की जाए।
23 मार्च 1931 को शाम में करीब 7 बजकर 33 मिनट पर भगत सिंह तथा इनके दो साथियों सुखदेव व राजगुरु को फाँसी दे दी गई। फाँसी पर जाने से पहले वे लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे और जब उनसे उनकी आखरी इच्छा पूछी गई तो उन्होंने कहा कि वह लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे और उन्हें वह पूरी करने का समय दिया जाए। कहा जाता है कि जेल के अधिकारियों ने जब उन्हें यह सूचना दी कि उनके फाँसी का वक्त आ गया है तो उन्होंने कहा था- “ठहरिये! पहले एक क्रान्तिकारी दूसरे से मिल तो ले।” फिर एक मिनट बाद किताब छत की ओर उछाल कर बोले – “ठीक है अब चलो।”
फाँसी पर जाते समय वे तीनों मस्ती से गा रहे थे –
मेरा रँग दे बसन्ती चोला, मेरा रँग दे;
मेरा रँग दे बसन्ती चोला। माय रँग दे बसन्ती चोला।।
फाँसी के बाद कहीं कोई आन्दोलन न भड़क जाये इसके डर से अंग्रेजों ने पहले इनके मृत शरीर के टुकड़े किये फिर इसे बोरियों में भरकर फिरोजपुर की ओर ले गये जहाँ घी के बदले मिट्टी का तेल डालकर ही इनको जलाया जाने लगा। गाँव के लोगों ने आग जलती देखी तो करीब आये। इससे डरकर अंग्रेजों ने इनकी लाश के अधजले टुकड़ों को सतलुज नदी में फेंका और भाग गये। जब गाँव वाले पास आये तब उन्होंने इनके मृत शरीर के टुकड़ो कों एकत्रित कर विधिवत दाह संस्कार किया। और भगत सिंह हमेशा के लिये अमर हो गये। इसके बाद लोग अंग्रेजों के साथ-साथ गान्धी को भी इनकी मौत का जिम्मेवार समझने लगे। इस कारण जब गान्धी कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में हिस्सा लेने जा रहे थे तो लोगों ने काले झण्डों के साथ गान्धीजी का स्वागत किया। एकाध जग़ह पर गान्धी पर हमला भी हुआ, किन्तु सादी वर्दी में उनके साथ चल रही पुलिस ने बचा लिया।
शहीदो की चिताओ पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मिटने वालो का यही बाकी निशा होगा
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Lucky Winner’s Of Gurmat Sunday Quiz No. 88

*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫ਼ਤਹਿ*

ਗੁਰਮਤਿ ਸੰਡੇ ਕੁਇਜ਼ ਨੰ: 88

ਸਹੀ ਜੁਆਬ ਹੈ
*D. ਚੰਦੂ ਨੇ*

ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਵਿੰਨਰ ਹਨ

ਪਹਲੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਹਰਜੋਤ ਸਿੰਘ*
ਨਵੀ ਦਿੱਲੀ
8826016160

ਦੂਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਦਲਜੀਤ ਕੌਰ*
ਅਲਵਰ (ਰਾਜ.)
(ਬੀਬੀਆਂ ਦਾ ਨੰਬਰ ਨਹੀਂ ਦੱਸਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ)

ਤੀਜੇ ਇਨਾਮ ਲਈ…
*ਹਰਦਿਆਲ ਸਿੰਘ*
ਨਵੀ ਦਿੱਲੀ
9810162048

ਸਾਰੇ ਵਿੰਨਰਸ ਨੂੰ ਵਧਾਈ

*ਵਿੰਨਰ ਆਪਣਾ… ਕੋਈ ਦੂਜਾ ਨੰਬਰ ਰਿਚਾਰਜ ਕਰਵਾ ਸਕਦੇ ਹਨ*

ਨੋਟ: 5pm ਤੱਕ ਸਹੀ ਭੇਜੇ ਗਏ ਜੁਆਬ ਦਾ ਡਰਾਅ ਨਿਕਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੱਕੀ ਡਰਾਅ ਰਾਂਹੀ ਵਿੰਨਰ ਚੁਣੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ

ਅਗਲੇ ਐਤਵਾਰ ਲਈ ਆਪ ਸਭ ਨੂੰ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾ

ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਸੁਆਲ ਦੇ ਹੇਠ ਲਿਖੇ T&C ਵੀ ਪੜੋ ਜੀ

*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕਾ ਖਾਲਸਾ*
*ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਕੀ ਫਤਿਹ*
🙏🏻🙏🏻🙏🏻